मधुबनी। बिहार की राजनीति में ऐसे कई चेहरे हैं, जिनकी पहचान केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहती। कुछ लोग कारोबार से आगे बढ़कर सामाजिक सरोकारों से जुड़ते हैं और फिर सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने लगते हैं। राजीव कुमार झा भी खुद को इसी यात्रा का हिस्सा मानते हैं।
कारोबार, सामाजिक गतिविधियों और राजनीति—इन तीनों क्षेत्रों में सक्रिय राजीव कुमार झा का कहना है कि सार्वजनिक जीवन का मूल उद्देश्य लोगों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करना होना चाहिए। मधुबनी के विकास को लेकर उनकी सोच बुनियादी सुविधाओं से आगे जाकर रोजगार, पर्यटन, मिथिला की कला-संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित दिखाई देती है।
राजीव कुमार झा की राजनीतिक यात्रा भी चर्चा में रही है। उन्होंने आरजेडी के युवा प्रकोष्ठ से राजनीतिक सफर शुरू किया और संगठन में राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा झारखंड के सह प्रभारी जैसी जिम्मेदारियां निभाईं। बाद में उन्होंने आरजेडी से अलग होने का फैसला किया। उनके अनुसार, यह फैसला उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत अनुभवों से जुड़ा था।
संघर्ष से बनी पहचान
राजीव कुमार झा अपनी सफलता को किसी एक उपलब्धि का परिणाम नहीं मानते। उनका मानना है कि सामान्य परिस्थितियों से निकलकर अपनी पहचान बनाना अपने आप में एक लंबा संघर्ष है।
कारोबार के क्षेत्र में भी उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि मुश्किल परिस्थितियों ने उन्हें निर्णय लेने, लोगों को समझने और समस्याओं के बीच रास्ता निकालने की क्षमता दी।

उनके लिए कारोबार केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने का माध्यम भी रहा है। यही अनुभव बाद में उनके सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण का आधार बना।
राजनीति में आने की वजह क्या रही?
राजीव कुमार झा के राजनीतिक सफर की शुरुआत आरजेडी के युवा प्रकोष्ठ से हुई। संगठन में काम करते हुए उन्हें पार्टी की विभिन्न जिम्मेदारियां मिलीं।
राष्ट्रीय प्रवक्ता और झारखंड के सह प्रभारी जैसी जिम्मेदारियों ने उन्हें राजनीति को करीब से समझने का अवसर दिया। उनके अनुसार राजनीति में आने का उद्देश्य केवल पद हासिल करना नहीं, बल्कि समाज और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को व्यापक मंच तक पहुंचाना था।
हालांकि बाद में आरजेडी से उनका अलगाव हुआ। इस फैसले को लेकर राजीव कुमार झा ने सार्वजनिक रूप से अपने अनुभवों और मतभेदों का उल्लेख किया है। उनका कहना रहा है कि राजनीति में विचार, सम्मान और संवाद उनके लिए महत्वपूर्ण हैं।
मनोज झा प्रकरण और आरजेडी से अलग होने का फैसला
आरजेडी छोड़ने के कारणों को लेकर राजीव कुमार झा ने कई बार अपनी बात रखी है। उनके अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेता मनोज झा के व्यवहार से वे काफी आहत हुए थे और यह घटनाक्रम उनके राजनीतिक फैसले की बड़ी वजहों में शामिल रहा।
यह उनका व्यक्तिगत राजनीतिक अनुभव और दृष्टिकोण है। राजीव कुमार झा का मानना है कि राजनीति में असहमति हो सकती है, लेकिन संवाद और व्यक्तिगत सम्मान की गुंजाइश हमेशा बनी रहनी चाहिए।
आरजेडी छोड़ने के बाद उन्होंने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नए विकल्पों पर विचार किया और सामाजिक गतिविधियों पर भी अपना ध्यान बढ़ाया।’

राजनीति से आगे समाजसेवा
राजीव कुमार झा की सार्वजनिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा समाजसेवा भी है। उनके अनुसार, उनके पास अलग-अलग इलाकों से लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं।
किसी को कानूनी सहायता की जरूरत होती है, तो किसी को इलाज के लिए मदद चाहिए। किसी परिवार की आर्थिक परेशानी होती है तो कोई प्रशासनिक स्तर पर अपनी समस्या का समाधान चाहता है।
राजीव झा का मानना है कि जनप्रतिनिधि या सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका केवल चुनाव के समय लोगों के बीच रहने की नहीं होनी चाहिए। जनता को आवश्यकता के समय उपलब्ध रहना ही सार्वजनिक जीवन की असली परीक्षा है।
आम आदमी की सबसे बड़ी लड़ाई क्या है?
राजीव कुमार झा के मुताबिक, आम आदमी की सबसे बड़ी परेशानी केवल किसी एक समस्या तक सीमित नहीं है। सड़क, जलजमाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सरकारी योजनाओं तक पहुंच—ये सभी समस्याएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
उनका मानना है कि जब किसी व्यक्ति को छोटी-सी समस्या के समाधान के लिए भी अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब व्यवस्था और नागरिक के बीच दूरी दिखाई देती है।
इसीलिए वे ऐसी राजनीति की बात करते हैं जिसमें जनप्रतिनिधि जनता और प्रशासन के बीच प्रभावी सेतु की भूमिका निभाए।
मधुबनी के लिए कैसी राजनीति चाहते हैं राजीव झा?
मधुबनी को लेकर राजीव कुमार झा की सोच केवल सड़क और नाली निर्माण तक सीमित नहीं है। वे जिले को आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से मजबूत बनाने की बात करते हैं।
उनका मानना है कि मधुबनी के पास अपनी अलग पहचान बनाने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। मिथिला की संस्कृति, मिथिला पेंटिंग, धार्मिक स्थल, ऐतिहासिक विरासत और स्थानीय प्रतिभाएं जिले की बड़ी ताकत हो सकती हैं।
उनके अनुसार, इन क्षेत्रों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो मधुबनी में रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं और युवाओं के पलायन को कम किया जा सकता है।
जिला परिषद को लेकर क्या है विजन?
राजीव कुमार झा जिला परिषद की भूमिका को ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखते हैं।
उनके अनुसार, जिला परिषद केवल योजनाओं की स्वीकृति या प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होनी चाहिए, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं को जिला स्तर तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए सक्रिय संस्था बननी चाहिए।
अगर उन्हें जनता का समर्थन मिलता है और वे जिला परिषद में प्रतिनिधित्व करते हैं, तो उनके अनुसार उनकी प्राथमिकताओं में सड़क और जलनिकासी व्यवस्था, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं तथा शिक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहेंगे।

पहले 100 दिनों की प्राथमिकताएं
राजीव कुमार झा की सोच के अनुसार शुरुआती 100 दिनों में तीन स्तरों पर काम को प्राथमिकता दी जा सकती है—
पहला—समस्या की पहचान। गांव और पंचायत स्तर पर बुनियादी समस्याओं की सूची तैयार करना।
दूसरा—प्राथमिकता के आधार पर समाधान। सबसे गंभीर समस्याओं को संबंधित विभागों के सामने प्रभावी तरीके से रखना।
तीसरा—जवाबदेही। जिन समस्याओं को उठाया गया है, उनके समाधान की प्रगति पर लगातार नजर रखना।
उनका मानना है कि जनप्रतिनिधि की भूमिका केवल समस्या बताने तक नहीं, बल्कि उसके समाधान तक प्रयास करने की होनी चाहिए।
मिथिला पेंटिंग से रोजगार तक
मधुबनी की पहचान विश्व स्तर पर मिथिला पेंटिंग से जुड़ी हुई है। लेकिन राजीव कुमार झा का सवाल है कि क्या इस कला को केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित रखा जाना चाहिए?
उनका मानना है कि मिथिला पेंटिंग को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सकता है।
इसके लिए कलाकारों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने, पर्यटन के साथ कला को जोड़ने और स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण एवं मार्केटिंग की व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
अगर ऐसा मॉडल विकसित होता है तो कलाकारों की आय बढ़ाने के साथ-साथ युवा पीढ़ी को भी इस पारंपरिक कला से जोड़ा जा सकता है।
युवाओं के पलायन को कैसे रोका जाए?
मधुबनी सहित उत्तर बिहार के सामने रोजगार और पलायन की चुनौती लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। राजीव कुमार झा का मानना है कि केवल सरकारी नौकरी के भरोसे युवाओं के भविष्य को सुरक्षित नहीं किया जा सकता।
स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योग, कृषि आधारित व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, पर्यटन, डिजिटल सेवाएं और स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग जैसे क्षेत्रों में अवसर पैदा करने की जरूरत है।
उनके अनुसार, जब युवा को अपने जिले में सम्मानजनक आय का अवसर मिलेगा तो पलायन की मजबूरी कम हो सकती है।
मधुबनी को पर्यटन के नक्शे पर लाने का सपना
राजीव कुमार झा मधुबनी को केवल एक प्रशासनिक जिला नहीं, बल्कि मिथिला की संस्कृति के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होते देखना चाहते हैं।
उनकी कल्पना में ऐसा मधुबनी है जहां धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ा जाए, मिथिला की कला-संस्कृति को पर्यटन से जोड़ा जाए और स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार मिले।
वे मानते हैं कि पर्यटन केवल होटल या सड़क बनाने का विषय नहीं है। इसके लिए परिवहन, स्वच्छता, सुरक्षा, स्थानीय गाइड, डिजिटल प्रचार, होमस्टे, स्थानीय भोजन और हस्तशिल्प—सभी को एक साथ विकसित करना होगा।
पांच साल बाद जनता के सामने क्या लेकर जाना चाहते हैं?
राजीव कुमार झा के लिए किसी भी राजनीतिक जिम्मेदारी की सफलता का अंतिम पैमाना जनता का अनुभव है।
उनके विजन के मुताबिक पांच साल बाद वे जनता के सामने पांच प्रमुख उपलब्धियों के साथ जाना चाहेंगे—
- ग्रामीण सड़कों और जलनिकासी व्यवस्था में सुधार।
- पेयजल और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ाना।
- शिक्षा और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करना।
- मिथिला पेंटिंग, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ना।
- मधुबनी के पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना।
“राजीव कुमार झा को ही क्यों चुनें?”
इस सवाल का जवाब राजीव कुमार झा की राजनीतिक सोच का सबसे संक्षिप्त परिचय हो सकता है।
उनके अनुसार, जनता को ऐसे प्रतिनिधि की जरूरत है जो चुनाव के समय ही नहीं, बल्कि पूरे कार्यकाल में उनके बीच रहे। जो समस्या को केवल सुने नहीं, बल्कि उसके समाधान के लिए प्रशासन से लेकर सरकार तक लगातार प्रयास करे।
राजीव झा अपनी पहचान को केवल राजनेता के रूप में नहीं देखते। कारोबार से मिले अनुभव, सामाजिक कार्यों से लोगों के बीच बना संपर्क और राजनीति में काम करने का अनुभव—इन तीनों को वे अपनी ताकत मानते हैं।
उनका संदेश साफ है—मधुबनी के विकास की राजनीति केवल चुनाव जीतने की राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि लोगों की जिंदगी में वास्तविक बदलाव लाने की राजनीति होनी चाहिए।
राजनीति में आदर्श कौन?
राजनीति में अपने आदर्श को लेकर राजीव कुमार झा का जोर ऐसे नेताओं पर दिखाई देता है जिन्होंने राजनीति को जनसेवा का माध्यम माना। उनके लिए राजनीतिक जीवन में विचार, संगठन, संघर्ष और जनता के प्रति जवाबदेही महत्वपूर्ण है।
वे मानते हैं कि किसी भी नेता का मूल्यांकन उसके भाषणों से ज्यादा उसके काम और लोगों के साथ उसके व्यवहार से होना चाहिए।
मधुबनी की कौन-सी समस्या सबसे ज्यादा परेशान करती है?
मधुबनी की बुनियादी समस्याएं राजीव झा के लिए सबसे बड़ा सवाल हैं। खासकर जलजमाव, सड़क, रोजगार और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं को वे आम लोगों के दैनिक जीवन से सीधे जुड़ा मुद्दा मानते हैं।
उनका कहना है कि जब विकास की मूलभूत सुविधाएं लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंचतीं, तब बड़े-बड़े विकास के दावे अधूरे लगते हैं।
मधुबनी के लिए सबसे बड़ा सपना
राजीव कुमार झा का सबसे बड़ा सपना ऐसा मधुबनी बनाना है जिसकी पहचान केवल पिछड़ेपन या पलायन से नहीं, बल्कि मिथिला की संस्कृति, कला, पर्यटन, रोजगार और आर्थिक विकास से हो।
वे चाहते हैं कि मधुबनी के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाने की मजबूरी कम हो और बाहर के लोग रोजगार, पर्यटन और निवेश के लिए मधुबनी की ओर आएं।
यही सोच उनके राजनीतिक और सामाजिक विजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा दिखाई देती है।
राजीव कुमार झा की राजनीतिक यात्रा अभी भी विकास के कई सवालों और संभावनाओं के बीच आगे बढ़ रही है। कारोबार से लेकर सामाजिक गतिविधियों और राजनीति तक का अनुभव उन्हें एक अलग तरह की सार्वजनिक पहचान देता है।
मधुबनी की राजनीति में उनकी आगे की भूमिका क्या होगी, यह आने वाला समय तय करेगा। लेकिन उनके बयानों और विजन से यह स्पष्ट है कि वे मधुबनी के विकास की चर्चा को केवल चुनावी मुद्दों तक सीमित नहीं रखना चाहते।
रोजगार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, मिथिला पेंटिंग और स्थानीय अर्थव्यवस्था—इन मुद्दों के जरिए मधुबनी की नई तस्वीर बनाने का उनका दावा आने वाले समय में राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकता है।