DESK : सुशांत सिंह राजपूत केस में कथित तौर पर सुसाइड के बाद उनकी बॉडी को कुल पांच लोगों
ने देखा था. दरअसल, सुशांत ने अपने कमरे में आत्महत्या की थी, जिसका दरवाजा काफी मश्क्कत के बाद भी खोला नहीं जा सका था. जिसके बाद उनके दोस्त ने एक चाबी वाले रफीक को बुलाकर दरवाजे का लॉक तोड़ा था. इसके बाद से इस केस में रफिक एक अहम गवाह बन गया है.

इस केस की जांच कर रही सीबीआई की एक टीम ने भी रफीक से पूछताछ की थी. इसके बाद मीडिया में भी रफीक की गवाही को रिकॉर्ड किया गया है.रफीक ने मीडिया में कहा कि सीबीआई अच्छा काम कर रही है, जल्द ही इस केस की सारी सच्चाई सामने आ जाएगी. उसने बताया कि 14 जून के बाद उसकी जिंदगी बदल गई है. वह जवाब दे कर थक गया है. उसका कहना है कि वो ये दिन को कभी नहीं भूल सकता. मुझे इस काम के लिए 2 हजार रुपये मिले पर वह ये दिन देखना नहीं चाहता था.

रफिक का कहना है कि सीबीआई को मैंने सभी सवालों को जवाब दे दिए, सुशांत की घटना के बाद 2 दिन मैंने खाना नहीं खाया था. मैं अभी भी सोच रहा हूं की मैंने लॉक क्यों खोला. 1 महीने के बाद सुशांत जैसा ही एक केस आया. मैं इतना डर गया था और सोच रहा था कि दरवाजा खोलू या नहीं? दरवाजा खोला, तो अंदर एक बुजुर्ग व्यक्ति लेटा हुआ था जिसकी तबीयत खराब थी. हमने उसकी मदद की और जल्द से जल्द अस्पताल भेजा और उसकी जान बचाई.

इसके साथ ही रफिक ने कहा कि सुशांत के दोस्त अगर थोड़ा जल्दी बुला कर लॉक खुलते तो शायद सुशांत की जान बच सकती थी. लॉक खोलने से सुशान्त जिंदा रहते तो मेरे हाथ से जीवन का सबसे अच्छा काम होता, लेकिन जब तक मैं पहुंचा सुशांत ने दुनिया को अलविदा कह दिया. इसके साथ ही उसने कहा कि सुशांत की आत्महत्या के समय कमरे में जो लोग मौजूद थे वो डरे हुए नहीं थे.

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