पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण में सभी की नजरें सीमांचल पर टिकी है. खासकर, सभी दलों की निगाहें मुस्लिम वोटरों पर है. राष्ट्रीय से लेकर बिहार के राजनीतिक दल के बड़े नेताओं ने इलाके में डेरा डाल रखा है. बीजेपी जहां, इस इलाके में बांग्लादेशियों के अवैध घुसपैठ का मुद्दा उठा रही है दूसरी तरफ नीतीश कुमार बचाव में उतर गए हैं. वहीं, कुशवाहा और ओवैसी के गठजोड़ ने महागठबंधन के नेताओं की नींद उड़ा रखी है.

मुस्लिम बहुल इलाके में एआईएमआआएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी बड़े फैक्टर बनकर उभरे हैं. ओवैसी ने सीएए और एनआरसी का मुद्दा उठाकर मुस्लिम मतदाताओं को अपनी ओर खिंचने में सफलता हासिल की है. वहीं, महागठबंधन के नेता सीमांचल और कोसी पर जीत का दावा करते हुए ओवैसी को बीजेपी का बी टीम बना बता रहे हैं. बावजूद इसके ओवैसी इन बातों को दरकिनार कर अपनी पकड़ मजबूत करते दिख रहे हैं.

सीमांचल में ओवैसी की दबदबा

बिहार चुनाव के आखिरी चरण में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएम महागठबंधन के खेमे में हलचल मचा रखी है. सीमांचल और कोसी क्षेत्र में दो दर्जन सीटों पर चुनाव लड़ रही एआइएमआइएम मुसलमान वोटरों तक पहुंचने में कामयाबी हासिल करती दिख रही है. वहीं, ओवैसी आक्रमकता के साथ लगातार जमीनी स्तर पर कैंपेनिंग कर रहे हैं.

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जीडीएसएफ बिगाड़ रहा सबका खेल

सियासी पंडित की मानें तो ओवैसी फैक्टर बिहार विधानसभा चुनाव में निर्णायक साबित हो सकता है. ओवैसी की वजह से महागठबंधन को भारी नुकसान हो सकता है. ओवैसी-कुशवाहा-मायावती-देवेंद्र यादव की जोड़ी मुस्लिम, यादव और अनुसूचित जाति के कैंडिडेट के जरिए महागठबंधन के वोट बैंक में सीधे सेंधमारी कर सकती है. बता दें कि असदुददीन ओवैसी ने 24 में से 6 सीटों से दलितों, ओबीसी और आदिवासियों को टिकट दिये हैं.

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