मैथिली ठाकुर ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी. उन्होंने ‘राम जी से पूछे जनकपुर की नारी…’, बता दे बबुआ…, छाप तिलक सब छीनी रे… जैसे गानों से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.

अहमदाबाद में आयोजित तीन दिवसीय बिहार महोत्सव के अंतिम दिन मैथिली ठाकुर के गीतों पर झूमते रहे अप्रवासी बिहारी। वहीं अर्जुन चौधरी के रिदम ऑफ बिहार में विभिन्न वाद्य मंत्रों पर आधारित एक फ्यूजन की प्रस्तुति हुई, जिसमें बिहार के पांच भाषाई अंचलों के संस्कार, त्योहार और परंपराओं का चित्रण सिर्फ वाद्य यंत्रों द्वारा किया गया। इसका मूल उद्देश्य भगैत, दंगल, आल्हा, र्की‍तन, देवास, चैता, नौटंकी, डपरा आदि बिहार के मूल वादन शैली को राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है।

फ्यूजन में तबला पर डॉ. अशोक साह, नाल पर अर्जुन कुमार चौधरी, पखावज पर आशुतोष उपाध्याय, ढोलक विजय कुमार चौबे, बांसुरी पर मो. शर्फुद्दीन, नगाड़ा पर विनोद पंडित और सितार पर नीरज कुमार मिश्रा के साथ मिलकर अन्‍य कलाकारों ने अहमदाबाद में दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

समापन समारोह में कला, संस्कृति एवं युवा मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि आयोजन की खास बात ये रही कि इसमें बिहारी और गुजराती संस्कृति का समागम हुआ। मौके पर विभाग के प्रधान सचिव रवि परमार, अपर सचिव सह निदेशक अनिमेष कुमार परासर, उपसचिव तारानंद वियोगी, ओएसडी सुनील कुमार वर्मा और अभिजीत आदि उपस्थित थे।

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