सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में कल शाम 5 बदे तक फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा में कल शाम 5 बदे तक फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया है। भाजपा की इसयाचिका पर बुधवार और गुरुवार को सुनवाई हुई। आज सुबह सुनवाई शुरू होते ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर एनपी प्रजापति से पूछा कि क्या वे वीडियो लिंक के जरिए बागी विधायकों सेबात कर सकते हैं और फिर उनके बारे में फैसला कर सकते हैं? इस पर स्पीकर की तरफ से पेश वकील अभिषेक सिंघवी ने सुप्रीम कोर्टको बताया– नहीं, ऐसा संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट भी स्पीकर को मिले विशेषाधिकार को हटा नहीं सकते।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई की। बेंच का सुझाव था कि हम बेंगलुरु या कहीं औरपर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर सकते हैं ताकि बागी विधायक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए स्पीकर से बात कर सकें। इससे पहलेबुधवार को करीब 4 घंटे चली सुनवाई में कांग्रेस, भाजपा, राज्यपाल, स्पीकर और बागी विधायकों की ओर से 5 वकीलों ने दलीलें पेशकीं। कांग्रेस ने कहा कि बागी विधायकों के इस्तीफे सौंपने के पीछे भाजपा की साजिश है। इसकी जांच होनी चाहिए। बहुमत परीक्षणके लिए रातों–रात मुख्यमंत्री और स्पीकर को आदेश देना राज्यपाल का काम नहीं है। स्पीकर इस मामले में सबसे ऊपर हैं, राज्यपाल उनपर हावी हो रहे हैं।

कांग्रेस ने विधायकों के इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर उपचुनाव होने तक फ्लोर टेस्ट नहीं कराने की मांग की। भाजपा ने इसका विरोधकिया। कोर्ट ने कहा कि 16 बागी विधायक फ्लोर टेस्ट में शामिल हों या नहीं, लेकिन उन्हें बंधक नहीं रखा जा सकता। वहीं, विधायकों नेकहा कि स्पीकर को उनके इस्तीफे मंजूर करने का निर्देश दिया जाए। जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच में कांग्रेसके वकील दुष्यंत दवे, भाजपा के वकील मुकुल रोहतगी, राज्यपाल के वकील तुषार मेहता, स्पीकर के वकील अभिषेक मनु सिंघवी औरबागी विधायकों के वकील मनिंदर सिंह ने पैरवी की।

बुधवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा– हम कैसे तय करें कि विधायकों के हलफनामे मर्जी से दिए गए या नहीं? यहसंवैधानिक कोर्ट है। हम संविधान के दायरे में कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। टीवी पर कुछ देखकर तय नहीं कर सकते। 16 बागी विधायकफ्लोर टेस्ट में शामिल हों या नहीं, लेकिन उन्हें बंधक नहीं रखा जा सकता। अब साफ हो चुका है कि वे कोई एक रास्ता चुनेंगे। उन्होंने जोकिया उसके लिए स्वतंत्र प्रक्रिया होनी चाहिए। इसके साथ ही अदालत ने वकीलों से सलाह मांगी कि कैसे विधानसभा में बेरोकटोकआने–जाने और किसी एक का चयन सुनिश्चित हो।

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