जिस कोरोना वायरस (Corona Viurs) से भारत समेत पूरी दुनिया में त’बाही मची हुयी है। उसे रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने आखिकार उसका antidod बना लिया है। जहाँ एक तरफ इस के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन जैसे कड़े कदम उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ डॉक्टर और वैज्ञानिक भी इसके लिए गहन प्रयास कर रहे हैं। उन्हें इसमें सफलता भी दिखाई देने लगी है। अमेरिकी वैज्ञानिकों को इस वायरस से हो रही कोविड-19 (Covid-19) बीमा’री के खि’लाफ लड़’ने वाले एंटीबॉडीज को बनाने में सफलता मिली है।

पिट्सबर्ग यूनिवर्सिटी की स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं को उत्साह जनक सफलता मिली है। उन्होंने एक सक्षम कोरोना वायरस वैक्सीन विकसित कर ली है जो कोविड-19 से ल’ड़ने के लिए पर्याप्त एंटीबॉडीज बनाने में सक्षम है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह वैक्सीन इंजेक्ट करने के दो हफ्तों में ही वायरस को बेअसर करने में सक्षम है।

मानवीय परीक्षण के लिए मांगी है इजाजत

इस वैक्सीन का प्रयोग शोधकर्ताओं ने अभी चूहों पर किया था जिसमें उन्हें बहुत ही उत्साहजनक नतीजे मिले हैं अध्ययन में इन शोधकर्ताओं ने बताया है कि अब वे अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) से इस वैक्सीन को अगले कुछ महीनों में मानवीय परीक्षण (Human Clinical Trail) के पहले दौर के लिए इजाजत ले रहे है। इसके लिए उन्होंने आवेदन दे दिया है।

Corona Virus, Covid 19कोरोना वायरस को लेकर दुनिया भर में तेजी से शोधकार्य हो रहा है।

दस लाख लोग हो चुके हैं संक्रमित
दुनिया में इस बीमारी से अब तक दस लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 53 हजार से ज्यादा की मौ’त हो चुकी है। इस बीमारी की वैक्सीन के लिए पहला मानवीय परीक्षण पिछले महीने सिएटल में हुआ था। इसके अलावा दुनिया भर में शोधकर्ता इस बी’मारी की वैक्सीन केलिए शोध कर रहे हैं, लेकिन इस तरह के शोध में यह पहला अध्ययन है जो प्रकाशित हुआ है।

पहले ही हो गई थी थोड़ी तैयारी
माना जा रहा है कि वैज्ञानिक इस बीमरी से निपटने के लिए जल्दी से सक्रिय हो सके क्योंकि उन्होंने इससे पहले फैली कोरोना वायरस की महामा”रियों पर कुछ काम कर लिया था. 2003 में फैली सार्स और 2014 में फैली मर्स बी’मारी को पहले ही किया गया शोध वैज्ञानिकों के काम आया.

क्या नाम दिया गया है इस वैक्सीन को
शोध से जुड़े एसोसिएट प्रोफेसर एंड्रिया गैमबोटो ने का. “ये दो वायरस (सार्स और मर्स), जो कोविड-19 से नजदीकी से जुड़े हैं, ने हमें स्पाइक प्रोटीन के बारे में सिखाया जो इन वायरस के खि;लाफ इम्यूनिटी पैदा करने में अहम हैं. हम जानते थे कि इस वायरस के खिलाफ हमें कहां लड़ना है. इस वैक्सीन को इन शोधकर्ताओं ने पिटकोवैक नाम दिया है. यह वायरल प्रोटीन के लैब निर्मित टुकड़ों से बनकर प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है जैसा कि फ्लू में होता है। फिलहाल यही उम्मीद है कि यह दवा इंसानो पर असर दिखाए।

source-news18

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