हमारे देश में लगभग हर घर में गैस सिलेंडर का इस्तेमाल होता है. मोदी सरकार के द्वारा शुरू की गई उज्ज्वला सरकार से भी लोगों को काफी फायदा हुआ है और घर घर तक एलपीजी सिलेंडर पहुंचा है. हालांकि कई लोग ऐसे भी हैं जो सिलेंडर का इस्तेमाल नहीं करते हैं।

ऐसे में कुछ नियम हैं जिनके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए. दरअसल एक नियम के अनुसार अगर कोई गैस एजेंसी आपको सिलेंडर की होम डिलिवरी नहीं देती तो आपको सिलेंडर लेने के लिए एजेंसी के गोडाउन जाना पड़ता है. जी हां, और ऐसे में आप उस गैस एजेंसी से एक तय राशि भी ले सकते हैं. और इसके लिए आपको कोई गैस एजेंसी वाला मना भी नहीं करेगा.

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आइए जानते हैं नियम

बता दें कि आपके पास जिस भी एजेंसी का कनेक्शन है उसके गोडाउन से आप सिलेंडर खुद लाते हैं तो आप एजेंसी से 19 रुपए 50 पैसा वापस ले सकते हैं और कोई भी एजेंसी यह राशि देने से इनकार नहीं कर सकती.

दरअसल, यह राशि डिलिवरी चार्ज के रूप में होती है. बता दें कि सभी कंपनियों के सिलिंडर के लिए यह राशि तय है. मालूम हो कि अभी तकरीबन महीना भर पहले ही इस राशि को बढ़ाया गया है. बता दें कि पहले डिलिवरी चार्ज 15 रुपए थी, अब इसे बढ़ाकर 19 रुपए 50 पैसा किया गया है.

एजेंसी के मना करने पर यहां करें शिकायत

बता दें कि अगर आपको कोई भी एजेंसी संचालक यह राशि देने से मना करता है आप टोल फ्री नंबर 18002333555 पर उसकी शिकायत कर सकते हैं.

जानिए कुछ और महत्वपूर्ण नियम

रेगुलेटर चेंज होता है फ्री में

बता दें कि अगर आपके सिलेंडर का रेगुलेटर लीक है तो आप इसे फ्री में एजेंसी से बदल सकते हैं. हालांकि इसके लिए आपके पास एजेंसी का सब्सिक्रिप्शन वाउचर होना चाहिए. बता दें कि आपको पहले लीक रेगुलेटर को अपने साथ लेकर एजेंसी जाना होगा. सब्सक्रिप्शन वाउचर व रेगुलेटर के नंबर को मिलाया जाएगा. उसके बाद दोनों का नंबर मैच होने पर रेगुलेटर बदल दिया जाएगा.

डैमेज होने पर भी बदलता है

बता दें कि अगर आपका रेगुलेटर किसी कारणवश डैमेज हो जाता है तो भी एजेंसी इसे बदलकर देगी. लेकिन, इसके लिए एजेंसी कंपनी टैरिफ के हिसाब से आप से राशि जमा करवाएगी. मालूम हो कि यह राशि 150 रुपए तक होती है.

चोरी होने पर भी मिलता है नया रेगुलेटर

वैसे तो ऐसा बहुत कम होता है लेकिन फिर भी आपको बता दें कि अगर आपका रेगुलेटर चोरी हो जाए और आप एजेंसी से नया रेगुलेटर चाहते हैं तो इसके लिए आपको पहले पुलिस में एफाईआर दर्ज करवानी होगी. एफआईआर रिपोर्ट की कॉपी जमा करने पर ही एजेंसी रेगुलेटर बदलकर देगी.

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