डेस्क: को’रोना वा’यरस के क’हर को रोकने के लिए मोदी सरकार ने पुरे देश में lockdown लगा रखा है . इस वजह से देश के कई हिस्सों में लोगों को खाने-पीने तक के लिए सं’घर्ष करना पड़ रहा है. इसी बीच हौसले की एक कहानी सामने आ रही है. असम के दोबोका क्षेत्र में रहने वाले 40 साल के अमर देबनाथ जो कहने को तो दिव्यांग हैं, लेकिन इनके हौसले आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.

ई-रिक्शा चलाने वाले अमर देबनाथ लोगों के घर-घर जाकर उन्हें खाने पीने का सामान बांट रहे हैं. इन सब के लिए उन्हें सरकारी या अन्य किसी तरह की मदद भी नहीं मिल रही है. वे अपने दम पर ये सारे काम कर रहे है . अमर ने साल 2008 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का लाभ उठाते हुए एक ई-रिक्शा खरीदा था. तब से वो अपने सेविंग्स के लिए हर रोज 50 रुपये जमा कर रहे थे.

पिछले 16 दिनों से जारी लॉकडाउन के बीच जब अमर ने लोगों को भू’ख से तड़’पते देखा तो उनकी आत्मा उन्हें क’चोटने लगी. उन्हें लगा कि वह इस विप’त्ति की घड़ी में लोगों को कैसे सहयोग कर सकते हैं. अमर देबनाथ कहते हैं, “मैं भी गरीब आदमी हूं. लेकिन कई ऐसे लोग हैं जो दो वक्त की रोटी पाने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं. इसलिए मैंने अपनी सेविंग्स से खाने का कुछ समान खरीदा और अपने आसपास के जरूरतमंद लोगों को पहुंचाने लगा.’

अमर देबनाथ बचपन में ही पोलि’यो के शि’कार हो गए थे. इस वजह से उनका शरीर तो पूर्ण विकसित नहीं हुआ, लेकिन उनका हौसला कई सामान्य लोगों से भी ज्यादा मजबूत है. साथ ही मानवता की मिशाल पेश कर रहे है.

source- aajtak.intoday.in

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