डेस्क: पुरी दुनिया में कोरोना वाय’रस (Corona Pandemic) ने त’बाही म’चा रखी है. भारत भी इसकी चपे’ट में है , जिसकी वजह से पुरे देश में lo’ckdown लगा हुआ है . इस लॉक डाउन में अमीर लोग तो घर पर आराम फरमा रहे है .लेकिन गरीब लोग दाने दाने के लिय तरस रहे है . लॉकडाउन (Lockdown) ने कई मजदूरों के समक्ष रोजी-रोटी की सम’स्या पैदा कर दी और म’जबूरन लोग अपने-अपने साधनों से दिल्ली को छोड़ घरों का रूख करने लगे. कुछ ऐसी ही कहानी है बिहार के तीन मजदूर वर्ग के दोस्तों की जो अपना ठेला चलाकर दिल्ली से अपने घर बिहार के बेगूसराय आ पहुचें .

1200 किमी तक चलाया ठेला

मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली से घर वापसी के लिए मजदूरों का जत्था एनएच पर रोजाना 120 किलोमीटर तक ठेला चलाता रहा ताकि किसी तरह समय रहते घर पहुंचा जा सके. ठेले पर ही कुछ आवश्यक सामान रखकर मन म ठान लिया कि किसी भी हाल में अपने घर जाना ही है. इस दौरान ठेला चला कर घर वापस आ रहे मजदूरों ने आपस में बारी बारी से ठेला चलाया. कभी किसी ने ठेले पर ही सोकर आराम किया तो कभी कहीं सड़क किनारे रूक कर.

दिल्ली से घर वापसी के लिए मजदूरों का जत्था एनएच पर रोजाना 120 किलोमीटर ठेला चलाता रहा ताकि किसी तरह समय रहते घर पहुंचा जा सके. ठेले पर ही कुछ आवश्यक सामान रखकर 12 सौ किलोमीटर की दूरी तय करने की इन दोस्तों ने ठान ली. ठेला चला कर घर वापस आ रहे मजदूरों ने आपस में बारी बारी से ठेला चलाया. कभी किसी ने ठेले पर ही सोकर आराम किया तो कभी कहीं सड़क किनारे रूक कर.

लॉकडाउन के बाद दिल्ली से बेगूसराय आने वाले मजदूरों ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि दिल्ली में वो सभी ठेले चला कर ही अपना गुजारा करते हैं साथ ही घर और परिवार के लिए बचत कर पैसे भी भेजते हैं. सभी मजदूर दिल्ली के आजादपुर मंडी में सब्जी ठेले पर लेकर घर-घर बेचने का काम नई दिल्ली और एनसीआर के क्षेत्र में करते रहे हैं जिनसे उन्हें हरेक माह दस हजार रुपए की बचत हो जाती थी लेकिन लॉकडाउन के बाद अगले 2 से 3 दिनों तक कोई काम नहीं मिलने के बाद खाने के ला’ले पड़ने लगे, जिसके बाद सभी मजदूरों ने घर वापस आने का फैसला लिया.

रास्ते में मिलती रही मदद

नई दिल्ली से ठेला लेकर निकलने के बाद रास्ते में मजदूरों को खाने-पीने से लेकर आने जाने में भी दि’क्कतों का सामना करना पड़ा. जगह-जगह पुलिस एनएच पर ठेले चलाने से भी मना करती रही लेकिन मजदूर आरजू मिन्नत कर आगे बढ़ते रहे. हालांकि ठेले पर खाने-पीने का कुछ जरुरी सामान मजदूरों रख लिया था लेकिन लखनऊ आते आते सभी सामान खत्म हो गया. इसके बाद रास्ते में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा चलाए जाने वाले राहत शिविरों में खाने का सामान मजदूरों को मिलता रहा और फिर मजदूरों का कारवां आगे बढ़ता गया. इस सफ़र के दौरान किसी भी ने हिम्मत नहीं हारी .

साल में सिर्फ दो बार आते थे घर

बेगूसराय के भगवानपुर थाना क्षेत्र के गांव के रहने वाले राजेश महतो, विकास नरसिंह और संभव बताते है कि कभी सोचा नहीं था कि जो ठेला उसे रोजी-रोटी देता था ,वही घर वापसी का सहारा भी होगा. इससे पहले ठेले को किराए के घर के पास या फिर मंडी के पास ही छोड़ कर साल में दो बार घर वापस आते थे लेकिन कोरोना वाय’रस के ड’र ने इस बार मीलों का सफर करने को वि’वष कर दिया.

दिल्ली में नहीं मिली मजदूरों को कोई मदद

ठेले से घर वापसी के लिए जद्दोजहद कर रहे मजदूरों ने बताया कि रात दिन कठिन मेहनत कर सभी लोग
ठेले से घर वापस आ रहे हैं. यदि उन्हें दिल्ली में खाने-पीने का आश्वासन स्थानीय प्रशासन और सरकार देती तो वे कभी इतनी मेहनत कर वापस नहीं आते. इनके इस कार्य ने यह बात एक बार यह साबित कर दिया कि बिहारी एक बार जो ठान लेते है उसे पूरा करके ही छोड़ते है .

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