डेस्क: बिहार की जीविका समूहों ने कमाल कर दिया . कोरोना आप’दा के बाद आम लोगों को सं’क्रमण से बचाने के लिए जीविका समूहों ने चंद दिनों के अंदर ही 5 लाख से अधिक मास्क बना दिए हैं । समूहों ने मास्क बनाने की रफ़्तार और भी तेज कर दी है . साथ ही इन्हें उचित मूल्य पर बेचने के लिए बाजार में भेजा गया है। राज्य की 1276 समूहों ने यह काम कर दिखाया है। सबसे ज्यादा मास्क 6 अप्रैल को बनाए गए। इस दिन 65 हजार 842 मास्क बनाए गए। अब तक राज्य में 5 लाख 7 हजार 947 मास्क बनाए जा चुके हैं।

ग्रामीण विकास विभाग का प्रयास है कि बिना मास्क के घर से कोई बाहर नहीं निकले। मास्क निर्माण के काम को शुरू करने से लॉकडाउन में  बेरोजगार बैठे जीविका समूह के लिए स्वरोजगार का एक माध्यम मिल गया है। उनके लिए आय का साधन भी मिल गया है। सबसे छोटे शेखपुरा जिले में 66, 657, पटना जिले में 35217, पूर्वी चंपारण में 51 हजार, मधुबनी में 43,000 औरंगाबाद में 26, 649 मास्क बनाए गए हैं।

नालंदा में काफी विलंब से काम शुरू हुआ। वहां 9 हजार मास्क बनाए गए। गया जिले में 22,669 जहानाबाद में 20,892 मास्क बनाए गए। वहीं, आधा दर्जन जिलों में कच्चे माल की आपूर्ति के कारण बनाने का काम बाधित हुआ। बांका, मुंगेर ,पूर्णिया और सिवान के जीविका समूहों को सामग्री नहीं मिल पाई। पटना जिले के बाढ़, बेलछी घोसवरी, मोकामा, बिहटा, मनेर, नौबतपुर और फुलवारीशरीफ में जीविका समूह के द्वारा मास्क बनाने का काम चल रहा है। 

साथ ही सभी जगह सोशल डिस्टेंसिंग के साथ काम चल रहा है। मास्क की बढ़िया गुणवत्ता को देखकर साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने अपने कर्मियों के लिए 54,000 मास्क खरीदे हैं। इसमें वह पटना के कर्मचारियों के लिए 24,000 और शेखपुरा के लिए 20,000 खरीदा है। विभिन्र्न प्रिंटिंग प्रेस, बैंक एनजीओ आदि अन्य संस्थानों ने भी मास्क खरीदे हैं।

सभी जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जीविका समूह को मास्क बनाने की सामग्री एवं संबंधित कच्चा माल की आपूर्ति सहज कराएं। स्थानीय स्तर पर खपत पर अधिक जोर दिया गया है।
-श्रवण कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here