पटना: बिहार के सारे बाहुबली जिसको कभी अपना गुरु मानते थे, वो हैं काली प्रसाद पांडे. ये विधानसभा चुनाव में कुचायकोट सीट से कांग्रेस के कैंडिडेट हैं. कहा जाता है कि 1987 में आई रामोजी राव की फिल्म ‘प्रतिघात’ में विलेन ‘काली प्रसाद’ का रोल इन्हीं पर बेस्ड था.

कुचायकोट, गोपालगंज लोकसभा क्षेत्र में आता है और पांडे गोपालगंज से लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं. पांडे के दबदबे का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में आज जितने भी बाहुबली नजर आते हैं, उनके उदय से पहले काली ही उत्तर बिहार के सबसे बड़े बाहुबली माने जाते थे.

इंदिरा राजीव के रह चुके हैं करीबी

हालांकि, काली पांडे खुद को बाहुबली नहीं मानते. कहते हैं कि लोग मुझसे बाहुबली होने के नाते नहीं डरते हैं. लोग इसलिए मेरा पैर नहीं छूते हैं क्योंकि मैं बाहुबली हूं, बल्कि इसलिए झुकते हैं क्योंकि मेरा व्यक्तित्व ऐसा है. मैं इंदिरा जी का करीबी रहा हूं. राजीव गांधी जी मेरे करीबी रहे हैं. सिवाय आचार संहिता के उल्लंघन के मेरे ऊपर कोई भी आरोप नहीं है, जो आरोप लगे वह साबित नहीं हुए.

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काली पांडे पर लगा था हत्या का आरोप

बता दें कि काली पांडे पर 1989 में प्रतिद्वंदी उम्मीदवार नगीना राय पर पटना में बम से हमला करवाने का आरोप लगा था. राय खुद भी एक क्रिमिनल थे. काली पांडे कहते हैं कि सारे सबूत और गवाहों से पता चला कि इसमें मेरा कोई हाथ नहीं. खुद पत्नी जो कि आई विटनेस थी, उन्होंने भी कहा कि नहीं काली पांडे का इसमें कोई हाथ नहीं है.

चिराग पर पांडे का गंभीर आरोप

वहीं, अचानक से एलजेपी पार्टी छोड़ने पर काली पांडेय कहते हैं कि चिराग अपने पिता जैसे नहीं हैं. इनसे बात करना ही मुमकिन नहीं हो पाता. इनसे 10 बार फोन पर कोशिश करो तो यह एक बार बात करते हैं. सबको साथ लेकर के नहीं चलते हैं.

पप्पू पांडे से है टक्कर

पांडे का राजनीतिक करियर 1984 में शुरू हुआ था. उसी साल इन्होंने गोपालगंज से लोकसभा चुनाव निर्दलीय जीता था. 2003 में पांडे, राम विलास पासवान की LJP में शामिल हो गए. इस बार कांग्रेस की सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं. काली पांडे का मुकाबला इस बार जेडीयू कैंडिडेट पप्पू पांडे से है. दोनों नेताओं का किस्मत फिलहाल ईवीएम मशीन में कैद है.

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