लोक आस्था का महापर्व छठ वैसे तो बिहार-झारखंड का महापर्व छठ है. लेकिन अब यह देश के कई अलग-अलग हिस्सों में मनाए जाने लगा है. वहीं, विदेशों में भी बसे बिहार के लोग छठ पर्व धूम-धाम से मनाते हैं. इस बार छठ पर्व 18 नवंबर से 21 नंवबर तक मनाया जाएगा, जिसकी शुरुआत आज नहाए-खाए से हो गई है.

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रांची में छठ पूजा का खास महत्व है. बताया जाता है कि यहां के नगड़ी गांव में छठ का व्रत रखने वाली महिलाएं नदी या तालाब की बजाय एक कुएं में छठ की पूजा करती हैं. इसके पीछे की मान्यता महाभरत काल से जुड़ी है. दरअसल मान्यता है कि इसी कुंए के पास द्रौपदी सूर्योपासना करने के साथ सूर्य को अर्घ्य भी दिया करती थी.

वनवास के समय ढहरे थे पांडव

कहा जाता है कि वनवास के दौरान पांडव झारखंड के इस इलाके में काफी दिनों तक ठहरे थे. एक बार जब पांडवों को प्यास लगी और दूर-दूर तक पानी नहीं मिला तब द्रौपदी के कहने पर अर्जुन ने जमीन में तीर मारकर पानी निकाला था. मान्यता के अनुसार इसी जल से द्रौपदी सूर्य को अर्घ्य दिया करती थी. सूर्य की उपासना कि वजह से पांडवों पर हमेशा सूर्य का आशीर्वाद बना रहा.

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एकाचक्री नामक नगरी का है जिक्र

वहीं, यहां ऐसी भी मान्यताएं हैं कि इस गांव में भीम का ससुराल था और भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच का जन्म भी यहीं हुआ था. जबकि एक दूसरी मान्यता यह भी है कि महाभारत में वर्णित एकचक्रा नगरी नाम ही अपभ्रंश होकर अब नगड़ी हो गया है. स्वर्ण रेखा नदी दक्षिणी छोटाना गपुर के इसी पठारी भू-भाग से निकलती है. इसी गांव के एक छोर से दक्षिणी कोयल तो दूसरे छोर से स्वर्ण रेखा नदी का उदगम होता है.

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