पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार नये-नये प्रयोग देखने को मिल रहे हैं. आरजेडी, जेडीयू से लेकर बीजेपी यादव कैंडिडेट पर भरोसा दिखा रही है. जिससे अन्य दूसरे समाज को उचित भागीदारी नहीं मिलने का आरोप लगना शुरू हो गया है. बिहार में नीतीश कुमार को कुर्सी तक पहुंचाने वाला कुशवाहा समाज ने बीजेपी, आरजेडी तथा अन्य दलों पर उचित भागीदारी नहीं देने का आरोप लगाया है.

हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी पार्टी ने अपने कोर वोट बैंक कुशवाहा कैंडिडेट को तरजीह दे रहे हैं. पटना लोकसभा क्षेत्र में भारी संख्या में कुशवाहा की आबादी होने के बावजूद टिकट नहीं मिलने से नाराजगी है. पटना सिटी विधानसभा क्षेत्र से रामदेव महतो विधायक रहते हुए बिहार सरकार में मंत्री रहे थे. हालांकि, इसके बाद नंदकिशोर यादव लगातार यहां से प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.

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वहीं, इस बार बीजेपी ने सासाराम से जवाहर प्रसाद सरीखे दिग्गज कुशवाहा नेता को टिकट से वंचित रखा है. ऐसे में कुशवाहा महासभा ने मोर्चा खोल दिया है. कुशवाहा महासभा के एक गुट ने एलान किया कि पटना सिटी से किसी भी कुशवाहा कैंडिडेट को समाज समर्थन करेगा. इसके बाद कुशवाहा महासभा के एक अन्य गट के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी वर्मा को उपेंद्र कुशवाहा ने टिकट दिया है. जेपी वर्मा पटना के एक बड़े दवा व्यवसायी के रूप में जाने जाते हैं. जेपी वर्मा उपेंद्र कुशवाहा के साथ लंबे समय से जुड़े हुए हैं.

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बता दें कि लॉकडाउन से पहले राजधानी पटना के विभिन्न चौक-चराहों पर बीजेपी के खिलाफ पोस्टरबाजी हुई थी. पटना सिटी से बीजेपी के दो बड़े नेताओं के एमएलसी रहते हुए निधन होने पर भी लोकसभा या विधानपार्षद में टिकट नहीं मिलने से नाराजगी थी. हालांकि, इससे घबराई बीजेपी ने पूर्व मंत्री सम्राट चौधरी को विधानपरिषद भेजा था. हालांकि, इस बार विधानसभा चुनाव में कुशवाहा समाज से पहले की अपेक्षा कम उम्मीदवारी मिलने से नाराजगी है.

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