पटना. बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार एनडीए में जहां सबसे बेहतर प्रदर्शन बीजेपी का रहा वहींं, जेडीयू का अपेक्षा अनुरूप काफी खराब स्ट्राइक रेट रहा. दूसरी तरफ 70 सीट पर चुनाव लड़कर मात्र 19 सीट पर सिमटने वाली कांग्रेस पार्टी पर सवालिया निशान लग रहे हैं.

70 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस का स्ट्राइक रेट महज 27 प्रतिशत रहा वहीं, वोट शेयर भी बेहद कम रहा. जबकि महागठबधन वाम दलों ने महज 29 सीटों पर चुनाव लड़कर 16 सीटों पर कब्जा जमाया. कांग्रेस के खराब परफॉर्मेंस से न सिर्फ महागठबंधन की सरकार बनने से चूक गई. बल्कि आरजेडी से लेकर पार्टी के नेता भी प्रदेश के पार्टी नेतृत्व पर हमलावर हैं.

खतरे से निपटने की तैयारी

पार्टी महासचिव तारिक अनवर का कहना है कि कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के कारण महागठबंधन की सरकार नहीं बनी. ऐसे में पार्टी को आत्मचिंतन करना चाहिए. वहीं, कहा जा रहा है कि कांग्रेस में टूट की भी आशंका है. कुछ विधायक पाला बदल कर एनडीए खेमे में जा सकते हैं. इस खतरे को भांपते हुए शुक्रवार को विधायक दल की बैठक बुलाई गई है.

होठल में रुके हैं विधायक

इस बैठक में सभी नवनिर्वाचित विधायकों की पटना स्थितसदाकत आश्रम में विधायक दल की बैठक होगी. वहीं, इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडेय भी शामिल होंगे. दूसरी तरफ सभी विधायकों को आलाकमान के संपर्क में रखते हुए विधायकों को पटना के अलग-अलग होटल में ठहराया गया है.

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बता दें कि गुरुवार को एनडीए के नेता और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी ने कहा था कि कांग्रेस के विधायकों को सीएम नीतीश कुमार का साथ देना चाहिए, क्योंकि दोनों की विचारधारा एक है. जाहिर है इसके बाद कांग्रेस में हलचल और तेज हो गई और टूट की आशंका जताई जाने लगी है.

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