पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की कांटे की टक्कर में जीत हुई. लेकिन नीतीश कुमार को बिहार की कुर्सी कांटों भरी है. छोटे भाई की भूमिका में आ चुकी जेडीयू के लिए अब पहले जैसा सत्ता चलाना आसान नहीं है. नीतीश कुमार को अब बीजेपी के साथ दो अन्य सहयोगियों का भी ख्याल रखना है.

बीजेपी इस बार जेडीयू से ज्यादा सीटें जीतकर आई है. ऐसे में नीतीश कुमार की सरकार पर सहयोगी दलों का दबाव भी रहेगा. एनडीए और महागठबंधन में शामिल छोटे दल कहीं पाला बदले तो तस्वीर ठीक उल्टा हो जायेगी. ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है. जिसका एहसास बीजेपी औऱ जेडीयू दोनों को है. जिसका स्पीकर रहेगा उसका पलड़ा भारी.

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कर्नाटक और मध्य प्रदेश में ऑपरेशन लोटस के दौरान स्पीकर के संवैधानिक ताकत का एहसास पूरा देश देख चुका है. स्पीकर को लेकर बीजेपी अभी से ही नजरें गड़ाई बैठी है. बीजेपी नेताओं ने नीतीश कुमार को भले ही सीएम मान लिया हो लेकिन स्पीकर अपनी पार्टी से रखना चाहते हैं. इस पर दो अन्य सहयोगियों की पैनी नजर है.

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