पटना: कोरोना संक्रमण काल में बिहार विधानसभा चुनाव काफी रोचक रहा. सत्ताधारी दल जेडीयू ने जहां फीका प्रदर्शन किया वहीं बीजेपी बिहार में बड़े भाई की भूमिका में आखिरकार आ गई. महागठबंधन ने पूरी ताकत लगा दी लेकिन सरकार बनाते-बनाते रह गए. तेजस्वी के सपनों पर एक शख्स ने न सिर्फ पानी फेर दिया बल्कि कांग्रेस को बिहार में बुरे प्रदर्शन के लिए मजबूर कर दिया.

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इस चुनाव में एआईएमआईएम प्रमुख असुद्दीन ओवैसी ने तीसरे मोर्चे के लिए ताबड़तोड़ रैलियां की. दूसरे दलों का प्रदर्शन फीका रहा लेकिन उनके लड़ाके 5 सीटों पर विजय हासिल की. सीमांचल में ओवैसी की दमदार धमक ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सीएम बनने के सपने को चकनाचूर कर दिया. आरजेडी और कांग्रेस के मुस्लिम कैंडिडेट्स को हार का सामना करना पड़ा.

तेजस्वी की प्लानिंग फेल

वहीं, अब ओवैसी ने तेजस्वी यादव का फिर से खेल खराब कर दिया है. दरअसल, महागठबंधन ने स्पीकर पद के लिए सिवान सदर से आरजेडी विधायक अवध बिहारी चौधरी को अपना कैंडिडेट बनाया है. वहीं, तेजस्वी ने आशा व्यक्त किया था कि ओवैसी के विधायक उनके कैंडिडेट के पक्ष में वोटिंग करेंगे , जिससे बहुमत के करीब जाया जा सकता है. हालांकि, एआईएमआईएम ने समर्थन देने से साफ इनकार कर दिया.

एआईएमआईएम का तेजस्वी को रेड सिग्नल

एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष सह विधायक अख्तरुल इमान ने कहा कि महागठबंधन को समर्थन देने का सवाल ही नहीं पैदा होता है. उनका तीसरा मोर्चा विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ चुका है. बता दें कि इससे पहेल तेजस्वी यादव ने बहुमत के लिए एआईएमआईएम के 5 विधायकों के समर्थन की बात पर कहा था कि उनके कैंडिडेट सभी से वोट देने की अपील करेंगे. आशा है कि सभी छोटे-छोटे दल और निर्दलीय विधायक समर्थन देंगे.

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