अभी देखा की अभयानंद के जातिविशेष कोचिंग वाले मेरे पोस्ट ने मेरी जमकर आलोचना की है, कुछ लोग अपशब्द कह गए, मज़बूरन वो कमेंट हटाया | चलिए कोई बात नहीं | सबको जवाब देना संभव नहीं है लेकिन मैं इस बात पे बस यही कहूंगा की बिहार एक गरीब राज्य है और लाखों बच्चों हैं जो अच्छी कोचिंग नहीं कर सकते, ऐसे में जातिगत कोचिंग व्यवस्था निंदनीय है | इसके कई नुक्सान है,

१. बिहार में दूसरों जातियों के बच्चे जो मेधावी हैं वो इस योजना से वंचित रह जाएंगे | २. जाति को लेकर इस उम्र के बच्चे और भी कट्टर होंगे | ३. आज कोचिंग जाती के आधार पे है कल को कोई प्राइवेट कमपनी भी जाति के आधार पे भर्ती करे तो वहाँ पे कुछ भी बोलने का मुँह नहीं होगा | ४. दूसरी जातियाँ भी सिर्फ अपनी जाती के हिसाब से ही सोचेंगी | ५. समाज में द्वे’ष की भावना फैलेगी |

बिहार की बर्बादी का सबसे बड़ा कारण यही अपनी जाति को लेकर ज़रूरत से ज्यादा संवेदनशीलता है जो इस हद तक जाती है की लोग हिंसक हो जाते हैं जैसे मेरे फेसबुक पे अभी हो जाएंगे और दिन में भी हो गए थे मेरे पिछले पोस्ट पे | अपनी जाति के प्रति घनघोर कट्टरता, अपनी जाति के लिए पागलपन, अपनी जाती को सर्वश्रेष्ठ समझना, जातियों के अंदर भी Sub – caste में भी श्रेस्ठ खोज लेना |

अपने यहां लोग अपने से निचे वाला जाति खोज लेते हैं | ये जाती को लेकर कट्टरता सामंतवाद को जन्म देता है इसके बारे में तो खैर बिहार और उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड कायम है | अंत में यही कहूंगा भाइयों बहनो की बिहार सोचिये, क्यूंकि जब बिहारी जम्मू से लेकर पंजाब अस बंगाल महाराष्ट्र इत्यादि में मार खाते हैं गाली सुनते हैं तो उनसे जात नहीं पूछा जाता, भूमिहार है की यादव, सब बराबर से “बिहारी” शब्द को एक व्यंग्य एक गाली की तरह सुनते हैं | इसलिए अभ्यानंद जी से अनुरोध है की उम्र के इस पड़ाव में ऐसा काम ना करें और बिहार को साथ लेकर चलें |

मेरी तो बस एक जाति – बिहारी, धर्म – भारतीय

Nitin Neera Chandra, Film maker

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