बिहार: को’रोना वायर’स से ल’ड़ने के लिए जहाँ राज्य के सभी डॉक्टर और स्वस्थायाकर्मी दिन रात काम कर रहे है. वहीँ दूसरी तरफ बिहार सरकार का रवैया बेहद निरा’शाजनक है. बिहार सरकार के 678 मेडिकल कॉलेज, सदर हॉस्पिटल, पीएचसी-सीएससी, रेफरल हॉस्पिटलों सहित दूसरे सरकारी हॉस्पिटलों में कार्यरत डॉक्टर, मेडिकल ऑफिसर, पैरामेडिकल स्टॉप सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी खाली पेट लोगों को कोरोना वायरस से बचा’ने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश के सरकारी हॉस्पिटलों में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों को पिछले 6 से 8 महीने से सैलरी नहीं मिली है. स्वास्थ्यकर्मी और उनसे जुड़े संगठनों ने प्रदेश सरकार सहित स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों से मुलाकात कर कई बार पैसे की मांग की. सैलरी और मानदेय की मांग को लेकर धर’ना-प्रदर्शन भी किया। लेकिन इसके बाद भी किसी को कोई पैसा नहीं मिला है.

हड़’ताल करने पर इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने हर महीने स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन रिलीज करने का दावा किया है, जबकि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े संगठन बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के महामंत्री विश्वनाथ सिंह ने उनके दावे काे गल’त बताया है। विश्वनाथ सिंह के मुताबिक प्रदेश के 7 मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल, 36 सदर हॉस्पिटल, 38 सब डिविजनल हॉस्पिटल और 67 रेफरल हॉस्पिटल सहित लगभग 530 पीएचसी-सीएसी हॉस्पिटलों में कार्यरत लगभग 15 हजार डॉक्टर व 20 हजार कर्मचारियों को पिछले 6 से 8 महीने से सैलरी नहीं मिली है।

सैलरी ना मिलने के कारण सभी स्वास्थ्यकर्मी मार्च के अंतिम सप्ताह में हड़ताल की तैयारी कर रहे थे, लेकिन कोरोना वायरस की महामारी को लेकर उन्होंने योजना स्थगित कर दी. सैलरी और मानदेय की मांग को लेकर प्रदेश के स्वास्थ्यकर्मियाें ने 8 फरवरी को वेतन नहीं तो काम नहीं के नारे के साथ ध’रना-प्रदर्श’न शुरू किया था. लेकिन, अधिकारियों के आश्वासन के बाद हड़ताल स्थगित कर दिया गया। 17 दिनों के इंतजार के बाद जब पैसा नहीं मिला, तो फिर 25 फरवरी को धर’ना-प्र’दर्शन किया था।


सैलरी नहीं मिलने से कर्मियों को हो रही परेशानी
सरकार पर जहां डॉक्टर, मेडिकल ऑफिसर, पैरामेडिकल स्टॉप का लगभग 200 करोड़ रुपए बकाया है, वहीं स्वास्थ्य से जुड़े दूसरे तकनीकी कर्मचारियों की सैलरी और मानदेय के रूप में लगभग 350 करोड़ रुपए सरकार ने नहीं दिए हैं। इसकी वजह से कर्मचारियों का काफी परे’शानी हो रही है। एक स्वास्थ्यकर्मी हरीश कुमार का कहना है कि सैलरी नहीं मिलने से घर खर्च के साथ अन्य कामों पर बहुत असर पड़ रहा है।

प्रदेश में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों को 6 से 8 महीने से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में यदि सरकार की ओर से स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन नहीं मिला तो वह हड़’ताल करने के लिए बाध्य होंगे। -विश्वनाथ सिंह, महामंत्री, बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ

इस विकट स्तिथि में कर्मचारी और डॉक्टर काम करे तो कैसे करे. बिना वेतन मिले वे दिन रात काम में लगे हुए है. ऐसे में सरकार का भी यह काम बनता है कि उन्हें समय पर वेतन मिल जाए .

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