NCRB की क्रा’इम रिपोर्ट ने बिहार की का’नून व्यवस्था की पो’ल खो’ल कर रख दी है। जिसके बाद से ही बिहार में लगातार बढ़ रही अप’राध की घट’नाओं पर सत्ता पक्ष और वि’पक्ष के बीच सि’यासी ब’हस एक बार फिर शुरू हो गयी है। बिहार सरकार और सुशासन बाबू चाहे कितना भी कह ले कि सब ठीक है। लेकिन नेशनल क्रा’इम रिकार्ड्स ब्यूरो यानी NCRB ने अपनी रिपोर्ट से सच को उजागर कर दिया है। NCRB ने वर्ष 2018 के लिये जारी अपनी रिपोर्ट में देश भर के 19 मेट्रोपोलिटन शहरों में होनेवाली ह’त्याओं में पटना को पहले स्थान पर रखा है।

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, पटना में हर एक लाख व्यक्ति पर साल 2018 में 4.4 लोगों की ह’त्या हुई है। जबकि जयपुर में यह आंकड़ा एक लाख में 3.3 रहा और लखनऊ में प्रति लाख 2.9 लोगों की ह’त्या हुई। वर्ष 2018 में हुई ह’त्याओं की बात की जाए तो बिहार का आंकड़ा पड़ोसी राज्य झारखंड से बेहतर रहा है। बिहार में 2018 में एक लाख पर 2.2 लोगों की ह’त्या का रिकॉर्ड दर्ज किया गया जबकि झारखंड में यह रिकॉर्ड 4.6, अरुणाचल प्रदेश में 4.2 और असम में 3.6 दर्ज किया गया है।

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इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में, महिलाओं के खिलाफ अ’पराध की संख्या 16,920 हो गयी, जो की चिं’ताजनक है। क्योंकि वर्ष 2017 की 14,711 की तुलना में 2,200 से अधिक मामले हैं। बता दें कि वर्ष 2016 में रिपोर्ट किए गए मामलों की संख्या 13,400 थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में 98.2 प्रतिशत ब’लात्कार के मामलों में अ’पराध पी’ड़ितों के जानने वालों ने किया।

इतना ही नहीं द’हेज के का’रण होने वाली मौ’त में भी पटना पहले पायदान पर है। यहां वर्ष 2018 में एक लाख की आबादी पर 2.5 लोगो की मौ’त द’हेज के का’रण हुई है। जबकि कानपुर में भी प्रति लाख 2.5 लोगों की मौ’त द’हेज के कारण हुई। यानी द’हेज के लिए हुई मौ’तों पर पटना और कानपुर संयुक्त रूप से पहले स्थान पर हैं। साथ ही 2018 में बिहार में ह्यू’मन ट्रे’फिकिंग के 179 मामले सामने आए जिसमें 231 पी’ड़ितों की व्यथा और दुश्वा’रियां सामने आयीं। यह भी देश भर में सर्वाधिक ह्यू’मन ट्रै’फिकिंग होने का रिकॉर्ड है।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार उर्फ़ सुशासन बाबू कानून व्यवस्था को लेकर चाहें कितनी भी बैठके करते है। नतीजा हमेशा शुन्य ही आता है। बिहार पुलिस खु’द श’राब बे’चने में सं’लिप्त पाई जाती जाती है। बिहार की पूरी कानून व्यवस्था चर्म’रा गयी है। जल्द ही बिहार सरकार ने क’ड़े फैसले नहीं उठाए तो स्तिथि और भी बत्त’र हो सकती है।

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